चुनाव की समस्या

चुनाव की समस्या एक बड़ी समस्या है। अर्थशास्त्र का भलीभाँति अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि व्यक्ति की आवश्यकताएँ अनन्त होती है जबकि इन आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित होते हैं। इस बात को स्पष्ट करते हुए प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो. रॉबिन्स ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “An Essay on the Nature and Significance of Economic Science (1932)” में लिखा है कि

“लक्ष्यों तथा उसके सीमित एवं वैकल्पिक उपयोगों वाले साधनों के परस्पर सम्बन्धों के रूप में मानव व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। मनुष्य अपनी सम्पूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति एक साथ नहीं कर सकता है क्योंकि उसके पास आवश्यकताएँ असीमित होती हैं जबकि उसकी पूर्ति के साधन सीमित होते हैं। तब उसके सामने चुनाव की समस्या उत्पन्न होती है। इस स्थिति में वह उस वस्तु का चुनाव करता है जिसकी उसे तीव्र आवश्यकता होती है।

लेखन विकास, चुनाव की समस्या

चुनाव की समस्या के आधार

चुनाव की समस्या के निम्नलिखित चार आधार हैं

  1. आवश्यकताओं का अनन्त होना – अर्थशास्त्री प्रो. रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र की परिभाषा में कहा है कि व्यक्ति की आवश्यकताएँ अनन्त होती हैं अर्थात् उनका कभी भी अन्त नहीं होता है।
  2. आवश्यकताओं का समान होना – प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं में समानता नहीं पायी जाती है अर्थात् उनमें भारी अन्तर होता है, किसी के लिये कुछ उपयोगी है तो किसी के लिये कुछ।
  3. साधनों के वैकल्पिक उपयोग – प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो. रॉबिन्स ने साधनों की सीमितता के साथ-साथ साधनों का वैकल्पिक उपयोग भी बताया है।

चुनाव एक आर्थिक समस्या

चुनाव की समस्या एक आर्थिक समस्या है इसे निम्न विवेचन द्वारा स्पष्ट किया गया है-

प्रथम स्थितिइस स्थिति में यह मानकर चलते हैं कि यदि प्रथम तीन बातें (आवश्यकताओं की अनन्तता, आवश्यकताओं में अन्तर होना एवं साधनों की सीमितता) ज्यों की त्यों बनी रहें, किन्तु अन्तिम आधार (साधनों का वैकल्पिक उपयोग) लागू न हो रही हो तो उपभोक्ता के समक्ष यह समस्या उत्पन्न नहीं होती कि वह साधनों का कहाँ और कैसे व्यय करें, किन्तु ऐसा सम्भव न होने के कारण आर्थिक समस्या का जन्म होता है।
द्वितीय स्थितिइस स्थिति में यदि हम यह मान लें कि निम्न तीन बातें आवश्यकताओं की अनन्तता, आवश्यकताओं में अन्तर एवं साधनों का वैकल्पिक उपयोग तो ज्यों की त्यों हैं, किन्तु साधन सीमित न होकर असीमित हैं तो चुनाव अर्थात् आर्थिक समस्या उत्पन्न नहीं हो सकती है।
तृतीय स्थिति इस स्थिति में हम यह मान लेते हैं कि उपरोक्त सभी बातें तो विद्यमान हैं, किन्तु आवश्यकताओं की तीव्रता में अन्तर नहीं है।
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