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चित्रलेखा उपन्यास

चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। यह ना केवल भगवती चरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने वाला उपन्यास है बल्कि हिंदी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है जिनकी लोकप्रियता काल की सीमा को लांगती रही है।

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चित्रलेखा उपन्यास का सारांश

चित्रलेखा की कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है। पाप क्या है? उसका निवास कहां है? इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए महाप्रभु रतनांबर के दो शिष्य, स्वेतांक और विशाल देव क्रमशः सामंत बीच गुप्त और योगी कुमार गिरि की शरण में जाते हैं। उनके निष्कर्षों पर महाप्रभु रतनांबर की टिप्पणी है

संसार में पाप कुछ भी नहीं है यह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की विषमता का दूसरा नाम है। हम ना पाप करते हैं ना पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है।

चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या

  1. पर एक बात याद रखना। जो ……………………………….. उसी समय यह ध्यान रखना पड़ेगा कि कहीं डूब ना जाओ।
  2. भेद जानना चाहोगे तो सुनो जिसे सब समुदाय का उल्लास ……………………………….. वह व्यक्ति का महत्व भाव भायोतपादक केंद्र बन जाता है।
  3. वासना पाप है जीवन को कलुषित बनाने का एकमात्र साधन है ……………………………….. क्रांतिकारक आवरण के रहते हुए इस में से किसी एक का पाना असंभव है।
  4. और सुख कहते हैं कि तृप्ति को यहां भी तुम भूलती हो। ……………………………….. दुखमय संसार छोड़ देने ही को सुख कहते हैं।
  5. ईश्वर मनुष्य का जन्मदाता है और मनुष्य समाज का जन्मदाता है। ………………………. धर्म के अंतर्गत सारा विश्व है।
  6. अंतरात्मा ईश्वर द्वारा निर्मित नहीं है ………………………. पर बात ऐसा नहीं है।
  7. स्त्री शक्ति है ………………………. अयोग्य एवं कार्य दोनों ही व्यक्ति अपूर्ण हैं।
  8. प्रेम का संबंध आत्मा से है, ………………………. आत्मा का संबंध अमर है।
  9. उन्माद और ज्ञान में जो भेद है ………………………. ईश्वर का एक अंश है और साथ ही प्रेम भी।
  10. मनुष्य को सुखी और संतुष्ट जीवन ………………………. जीवन का सर्व सुंदर लक्ष्य है
  11. यौवन हलचल चाहता है ………………………. किसी समय उनका पर्थक्य अनुभव किया जा सकता है।
  12. बिना रात के दिन का कोई महत्व नहीं है ………………………. और बिना सुख के दुख का कोई मूल्य नहीं है।
  13. मनुष्य को पहले अपनी कमजोरियों का दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।…………………………… जो अपनी कमजोरियों को जानकर उनको दूर करने का उपाय कर सके।
  14. नई समर्थ के लिए इसमें कोई गलती नहीं जो व्यक्ति समाज को ठुकरा कर जीवित रह सकता है ………………………. उस आग को दबाकर कर्तव्य रत हो जाना उचित होगा।
  15. जान तर्क की कोई चीज नहीं है, अनुभव की चीज है। ………………………. जब तक इस प्रश्न का उत्तर ना दे लूंगा तब तक मुझे शांति नहीं मिलेगी।
  16. तुम कहां जा रहे हो ………………………. तुम जाते कहां हो।
  17. गत जीवन को फिर नहीं अपना सकती ………………………. यही तो नियम है, पाप में अथवा पुण्य में, समझे?
  18. एक छड़ के लिए मेरी इच्छा ………………………. किस बल पर तुमने मेरा प्रेम चाहते हो।

व्याख्याएँ जान्ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

चित्रलेखा उपन्यास आलोचनात्मक प्रश्न

  1. चित्रलेखा उपन्यास के कथानक की समीक्षा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कीजिए।
  2. चित्रलेखा उपन्यास के कथानक को अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
  3. संवाद की दृष्टि से चित्रलेखा उपन्यास की समीक्षा कीजिए।
  4. चित्रलेखा किस प्रकार का उपन्यास है? इसकी कथानक योजना तथा उद्देश्य को दृष्टि में रखकर समीक्षा कीजिए।
  5. चरित्र चित्रण की दृष्टि से चित्रलेखा उपन्यास की सफलता असफलता की विवेचना कीजिए।
  6. चित्रलेखा उपन्यास की नायिका चित्रलेखा के व्यक्तित्व एवं चरित्र का मूल्यांकन कीजिए।
  7. चित्रलेखा उपन्यास में व्यक्त दर्शन और जीवन दर्शन की विवेचना कीजिए।
  8. उपन्यास के आधार पर बीज गुप्त का चरित्र चित्रण कीजिए।
  9. औपन्यासिक तत्वों के आधार पर भगवती चरण वर्मा की कृति चित्रलेखा की विवेचना कीजिए।
  10. स्वेतांक का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  11. विशाल देव का संक्षिप्त चरित्र चित्रण कीजिए।
  12. सहनायिका के रूप में यशोधरा के चरित्र का चित्रण कीजिए।
  13. चित्रलेखा की दृष्टि में जीवन का सुख क्या है?
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