गणित का अर्थ

गणित का अर्थ – गणित अंक, आधार, चिन्ह, आदि संक्षिप्त संकेतों का वह विधान है जिसकी सहायता से परिमाण दिशा तथा स्थान का बोध होता है। गणित शब्द बहुत प्राचीन है तथा वैदिक साहित्य में इसका बहुतायत से उपयोग किया गया है। गणित शब्द का शाब्दिक अर्थ है “वह शास्त्र जिसमें गणना की प्रधानता हो”।

गणित का अर्थ

गणित विषय का प्रारंभ गिनती से ही हुआ है। और संख्या पद्धति इसका एक विशेष क्षेत्र है। जिसकी सहायता से गणित की अन्य शाखाओं का विकास किया गया है। वेदांग शास्त्रों में गणित को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। प्राचीन भारत मैं गणित में संख्या गणना ज्योतिष एवं क्षेत्र गणित सम्मिलित है। कुछ विद्वानों का मत है कि हिंदू गणित के अंतर्गत परीकर्म, व्यवहार रज्जू, राशि, कलास वर्णन, वर्ग घन तथा विकल्प थे।

गणित का अर्थ
गणित का अर्थ

गणित में आने वाली क्रियाओं को करने के लिए लेखन सामग्री का प्रयोग किया जाता था या पाटी पर धूल बिछाकर किसी नुकीली कलम या लकड़ी से। इस प्रकार प्राचीन भारत में गणित की अध्ययन प्रक्रिया में पार्टी गणित तथा धूलि कर्म शब्दों का बहुत प्रचलन था। प्राचीन काल से ही शिक्षा में गणित का सदा उचित स्थान रहा है ।

गणित की परिभाषाएं

Mathematics is the queen of science.

Mathematics is a language.

Mathematics is the study of abstract elements. These elements are not described in any correlate fashion.

Mathematics may be defined as the subject in which we never know what we are talking about whether what we are saying is true.

Mathematics is supposed to be the servant of science.

Mathematics may be defined as a science of quantity and space.

Natural science is a science only in so far as it is mathematical.

गणित की परिभाषा
गणित का अर्थ

गणित के उपयोग

गणित के बारे में तो जैन गणितज्ञ श्री महावीर आचार्य ने अपनी गणित सार संग्रह नामक पुस्तक में अत्यंत प्रशंसा की है। वह लिखते हैं कि अलौकिक वैदिक तथा सामाजिक जो जो व्यापार हैं उन सब में गणित का प्रयोग है। काम शास्त्र, अर्थशास्त्र, पार्क शास्त्र, गंधर्व शास्त्र, नाट्यशास्त्र, आयुर्वेद, भवन निर्माण शास्त्र आदि विषयों में तथा छंद, अलंकार का वितर्क व्याकरण ललित कला आदि समस्त विधाओं में गणित अत्यंत उपयोगी है।

सूर्य आदि ग्रहों की गति ज्ञात करने में दिशाओं तथा समय ज्ञात करने में चंद्रमा के पहले खाद में सर्वत्र गणित का प्रयोग करना पड़ता है। महाद्वीपों समुद्रों पर्वतों की संख्या, सभा भवन एवं गुंबदकार मंदिरों के परिमाण तथा अन्य बातें गणित की सहायता से जानी जाती हैं।

  1. बौद्धिक मूल्य
  2. प्रयोगात्मक मूल्य
  3. अनुशासन संबंधी मूल्य
  4. नैतिक मूल्य
  5. सामाजिक मूल्य
  6. सांस्कृतिक मूल्य
  7. कलात्मक मूल्य
  8. जीविकोपार्जन संबंधी मूल्य
  9. मनोवैज्ञानिक मूल्य
  10. अंतरराष्ट्रीय मूल्य
गणित का उपयोग
गणित का अर्थ
गणित का अर्थगणित का इतिहासगणित की प्रकृति
गणित की भाषा और व्याकरणआधुनिक गणित का विकासगणित की विशेषताएं
गणित का महत्वगणित शिक्षण में पाठ्यपुस्तक का महत्वपाठ योजना
गणित प्रयोगशालाआदर्श गणित अध्यापक के गुणगणित शिक्षण के उद्देश्य
गणित शिक्षण के मूल्यपाइथागोरस और उनके योगदानरैनी देकार्ते के योगदान
यूक्लिड और उनके ग्रंथ
guest

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments