अल्पविकसित देश

अल्पविकसित देश – मोटे तौर पर विश्व के देशों को दो भागों में बाँटा जाता है विकसित तथा अल्पविकसित अथवा घनी तथा निर्धन राष्ट्र निर्धन देशों को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे निर्धन, पिछडे अल्पविकसित, अविकसित और विकासशील देश। ये सभी शब्द पर्यायवाची शब्द है, परन्तु इनके प्रयोग में मतभेद रहा है। इसी मतभेद के कारण प्रो. गुन्नार मिर्डल ने एक अधिक गतिशील एवं व्यापक शब्द अल्प विकसित का समर्थन किया है।

अल्पविकसित देश

यह अधिक उपयुक्त है क्योंकि यह शब्द विकास की दो चरम सीमाओं अविकसित औरविकसित के मध्य में स्थित होने के कारण इन देशों को अगले छोर पर पहुँचने के लिए प्रेरित करता है। हाल के वर्षों में ऐसे देशों के लिए तुलनात्मक रूप में एक अधिक सम्मानजनक शब्द विकासशील देश का प्रयोग होने लगा है। यह शब्द विकासशील एक अवरुद्ध अर्थव्यवस्था के बजाय विकास की ओर पलायन करती हुयी अर्थव्यवस्था का प्रतीक है। एक अल्प विकसित देश में जन्म व मृत्यु दर दोनों ऊँची होती है जबकि विकासशील देश में ऊँची जन्म दर के बावजूद मृत्यु दर घटने लगती है। हाल के वर्षों में इन देशों के लिए एक नया शब्द तीसरा विश्व प्रयुक्त होने लगा है।

अल्पविकसित देश परिभाषाएं

अल्प विकसित या विकासशील देश वह है, जिसकी प्रति व्यक्ति वास्तविक आय अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया तथा पश्चिमी यूरोपीय देशों की प्रति व्यक्ति वास्तविक आय की तुलना में कम है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विज्ञाप्ति के अनुसार

एक अल्पविकसित देश अथवा क्षेत्र वह है, जिसमें उत्पत्ति के सम्भावनाएँ अन्य साधनों की तुलना में उद्यम एवं पूँजी का अपेक्षाकृत कम अनुपात है, परन्तु जहाँ विकास विद्यमान है और अतिरिक्त पूँजी को लाभजनक कार्यों में विनियोजित किया जा सकता है।

प्रो. मेकलियोड के मतानुसार

एक अल्पविकसित या विकासशील अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है. जिसमें पूंजीगत वस्तुओं की उपलब्ध मात्रा देश की कुल श्रम शक्ति को आधुनिक तकनीक के आधार पर उपयोग करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

प्रो. ऑस्कर लैज के अनुसार

अल्प विकसित देश वह देश है, जिसमें अधिक पूँजी अथवा अधिक श्रमशक्ति अथवा अधिक उपलब्ध साधनों अथवा इन सबको उपयोग करने की पर्याप्त सभावनाएँ हो जिससे कि वर्तमान जनसंख्या के रहन-सहन के स्तर को ऊँचा उठाया जा सके और यदि प्रति व्यक्ति आय पहले से ही काफी अधिक है तो रहन-सहन के स्तर को कम किये बिना अधिक जनसंख्या का निर्वाह किया जा सके।

जेवर वाईनर के अनुसार
अल्पविकसित देश परिभाषा

एक अल्पविकसित देश वह देश है, जहाँ पर एक और अप्रयुक्त मानवीय शक्ति और दूसरी और अवशोषित प्राकृतिक साधनों का कम या अधिक मात्रा में सह अस्तित्व पाया जाता है। सामान्यतया एक अल्पविकसित देश या विकासशील देश यह है जहाँ जनसंख्या की वृद्धि की दर अपेक्षाकृत अधिक हो. पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक साधन उपलब्ध हो, परन्तु उनका पूर्णरूपेण विदोहन न हो पाने के कारण उत्पादकता व का स्तर नीचा हो।

भारतीय योजना आयोग के अनुसार

अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लक्षण

यदि हम विश्व के कीमत की समस्त विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण करते हैं तो इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में विभिन्न विशेषताएँ हैं। विश्व की कुछ ऐसी अर्थव्यवस्था है। जहाँ प्राकृतिक संसाधनों की बहुलता है। प्रो० एस०लाइवेन्सटीन ने अल्पविकसित अर्थव्यवस्था को चार मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया है- 1. आर्थिक विशेषताएँ, 2. जनांकिकी विशेषताएँ, 3. तकनीकी विशेषताएँ, 4. सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विशेषताएँ ।
उपर्युक्त चार वर्गों के लक्षणों के आधार पर अल्पविकसित देश के विभिन्न लक्षणों का अध्ययन किया जाता है जो निम्नवत् हैं-

कृषि की प्रधानता

एक अल्पविकसित देश मुख्य रूप से प्राथमिक उत्पादक है। इन देशों में अधिकांश जनसंख्या कृषि एवं कृषि से सम्बद्ध क्रियाओं में लगी रहती है, और कृषि आधारित उद्योग अधिक होते हैं। देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product) में कृषि क्षेत्र का योगदान अधिक होता है विकासशील देशों की लगभग 70-90 प्रतिशत जनसंख्या कृषि में लगी रहती है।

वर्तमान में भारत 58.2% जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। भारत में कृषि का सकल राष्ट्रीय उत्पाद GDP में योगदान 22.1% है, इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि अल्पविकसित देशों में राष्ट्रीय आय में योगदान तथा कृषि पर जनसंख्या की निर्भरता अधिक है। अतः कृषि तथा प्राथमिक उत्पादन की प्रधानता अल्पविकसित देशों का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है।

कृषि

प्रतिव्यक्ति निम्न आय

अल्पविकसित देशों की दूसरी एक मुख्य विशेषता यह है कि इनकी प्रति व्यक्ति आय का स्तर बहुत ही निम्न होता है। इसी कारण इन देशों में दरिद्रता के विशाल सागर दिखाई पड़ते हैं।है। अल्पविकसित देशों में जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा विश्व बैंक के 2008 के एक प्रकाशन के अनुसार अल्पविकसित देशों की प्रतिव्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। भारत की प्रतिव्यक्ति आय मात्र 520 डालर है जो कि अत्यधिक पिछड़ेपन का सूचक है। अल्पविकसित देशों का आय स्तर ही निम्न नहीं है, बल्कि आय स्तर में असमानता भी है।

जनसंख्या की तीव्र वृद्धि

अधिकांश अल्पविकसित देशों में जनसंख्या अत्यधिक होती है अर्थात् आधिक्य की स्थिति दिखाई पड़ती है। दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकांश देशों में जनसंख्या बहुत घनी है। इन देशों की जनसंख्या वृद्धि दर विकसित देशों की तुलना में काफी अधिक होती है। वर्तमान में अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के अधिकांश देश जनाधिक्य से पीड़ित हैं, क्योंकि तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या आर्थिक विकास के लिये एक समस्या बनी हुई है।

जनसंख्या की वृद्धि दर 1980-1991 के बीच अल्पविकसित देशों में 2.5% से अधिक रही है तथा 1991-2001 के मध्य लगभग 2% की औसत वृद्धि हुई है जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि अल्पविकसित देशों की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता अत्यधिक जनाभार और जनसंख्या की ऊंची वृद्धि दर है।

समाज सुधार आंदोलन

पूंजी निर्माण की निम्न दर

अल्पविकसित अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण की दर की न्यूनतम होती है जो कि अल्पविकसित अर्थव्यवस्था की विशेषता है। अल्पविकसित अर्थव्यवस्था में पूँजी की कमी के कारण प्रति व्यक्ति उत्पादकता का स्तर निम्न होता है क्योंकि बेरोजगारी की समस्या होती है। अधिकांश अल्पविकसित देशों में बचत की दर 5 से 10 प्रतिशत तक होती है। जबकि विकसित देशों में यह दर 1.5 से 25 प्रतिशत तक होती है।

तकनीकी पिछड़ापन

अल्पविकसित अर्थव्यवस्थाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवप्रवर्तनों का स्तर बहुत ही निम्न होता है। इन अर्थव्यवस्थाओं में तकनीकी पिछड़ापन होता है जिसके कारण विभिन्न नवकरणीय एवं गैर-नवकरणीय स्रोतों की जानकारी और उनका दोहन नहीं हो पाता है। प्रो० शुम्पीटर इसीलिए तकनीकी प्रगति को आर्थिक विकास का एकमात्र घटक मानते हैं।

रूढ़िवादी सामाजिक ढाँचा

अल्पविकसित देशों में सामाजिक रूढ़िवादिता विद्यमान रहती है। लोगों में धार्मिक विश्वास और परम्पराएँ लोगों के जीवन की अभिवृत्ति को निर्धारित करती है। इन देशों की जनता भाग्यवादी, अकर्मण्य एवं साहसहीन होते हैं। सामाजिक संस्थाएं देश के आर्थिक विकास में अवरोधक होती हैं जैसे जाति प्रथा, संयुक्त परिवार प्रणाली तथा उत्तराधिकार नियम उत्पादन के साधनों की गति को कम करके आर्थिक विकास में अवरोधक होते हैं।

अल्पविकसित देशों में बहुत से व्यवसाय कुछ विशिष्ट जातियों द्वारा परम्परागत आधार पर चलाए जाते हैं जिसमें दूसरी जातियों का प्रवेश समाज द्वारा अनुचित माना जाता है। अतः सामाजिक एवं धार्मिक अंधविश्वास या रूद्रिवादिता अल्पविकसित देशों की एक प्रमुख विशेषता है।

अल्पविकसित देश की व्यवस्था

अल्प विकसित देशों की विशेषताएं

अल्प विकसित देशों की विशेषताएं निम्न प्रकार है

कृषि की प्रधानता

अल्पविकसित अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से प्राथमिक वस्तु उत्पादक होता है। इन देशों में अधिकांश जनसंख्या कृषि एवं कृषि से सम्बद्ध क्रियाओं में लगी रहती है। अल्पविकसित देशों में राष्ट्रीय आय में योगदान, कृषि क्षेत्र का अधिक होता है अतः कृषि तथा प्राथमिक उत्पादन की प्रधानता अल्पविकसित देशों का एक लक्षण है।

पूँजी का अभाव व पूँजी निर्माण की धीमी दर

पूँजी की कमी अल्पविकास युक्त देशों में उत्पादकता होने का कारण और परिणाम दोनों है। इन देशों में पूँजी की प्रति व्यक्ति उपलब्धता विकास प्राप्त देशों की तुलना में बहुत कम है। इसीलिए इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अनिवार्य रूप से उत्पादकता के निम्न स्तर पर काम करना पड़ता है। जनसंख्या अधिक होने के कारण इन देशों में निम्न आय स्तर होता है, जो भावी विकास के लिए वांछित विनियोग दर से पूरी नहीं कर पाते जिससे पूँजी निर्माण व आर्थिक विकास का काम रुक जाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं

आय का असामान्य वितरण

अल्पविकसित देशों में आय का जनसंख्या के बीच वितरण असामान्य ढंग से होता है। राष्ट्रीय आय का अधिकांश भाग अल्पसंख्यक अमीरों को और जनसंख्या के एक बड़े भाग जो आर्थिक दृष्टि से कमजोर हैं, को कुल राष्ट्रीय आय का थोड़ा ही भाग मिल पाता है। प्रो० महोलनोबीस के अनुसार, भारत में देश की 5 प्रतिशत जनसंख्या को राष्ट्रीय आय का 3 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है।

1 प्रतिशत जनसंख्या को 11 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत निर्धन जनसंख्या को राष्ट्रीय आय का मात्र 10 प्रतिशत भाग ही मिल पाता है। धीरे-धीरे ये असमानताएं और बढ़ती जा रही हैं। जब तक आय व धन की असमानताएं बनी रहेंगी तब तक विश्व की विकसित, अल्पविकसित अर्थव्यवस्थाएं एक धरातल पर नहीं ला जा सकती है।

तकनीकी का अल्पविकास

प्रो० कुटनेटस के मतानुसार इन देशों में तकनीकी विकास के चार महत्त्वपूर्ण चरणों, वैज्ञानिक खोज, आविष्कार, नव प्रवर्तन तथा सुधार का प्रायः अभाव होता है। तकनीकी पिछड़ेपन के सम्भवतः तीन कारण दृष्टिगत होते हैं- (i) नीची मजदूरी के बावजूद उत्पादन लागत ऊँची होना, (ii) उत्पादन का निम्न स्तर, (iii) उत्पादन के लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता जो कि उनके पास नहीं होती।

भाषा प्रयोगशाला के लाभ

अल्प विकास से क्या तात्पर्य है?

अविकसितता यह दर्शाती है कि किसी देश का विकास एक निश्चित स्तर से नीचे है।

अल्पविकसित अर्थव्यवस्था क्या है?

अल्पविकसित अर्थव्यवस्था का अर्थ सामान्यतः एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था वह होती है, जिसमें आर्थिक विकास अपनी प्रारम्भिक अवस्था में होता है

विकसित क्या है?

विकसित अर्थात विकास को प्राप्त कर लेने की प्रक्रिया जिसने विकास के किसी आधार को प्राप्त कर लिया है उसे विकसित कहा जाता है।

सबसे ज्यादा विकसित देश कौन है?

Human Development Index और ऐसे ही कई सर्वे में नॉर्वे टॉप रैंकिंग पाता है। नॉर्वे दुनिया में सबसे अधिक विकसित लोकतंत्र और न्यायिक देश माना जाता है।

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