अनुदेशन तकनीकी

अनुदेशन तकनीकी को निर्देशन तकनीकी भी कहते हैं। अनुदेशन का अर्थ उन क्रियाओं से होता है जो अधिगम में सुविधायें प्रदान करती हैं। इसमें शिक्षक और छात्र के मध्य अन्तःक्रिया आवश्यक नहीं होती। साधारणतया शिक्षण और अनुदेशन में कोई अन्तर नहीं किया जाता है। अनुदेशन और शिक्षण दोनों में छात्रों को सीखने की प्रेरणा दी जाती है।

अनुदेशन

अनुदेशन का अर्थ है सूचनाएँ प्रदान करना। जबकि शिक्षण में शिक्षक और छात्रों के बीच अन्तःक्रिया का होना अति आवश्यक है। परन्तु अनुदेशन में छात्र अभिक्रमित अनुदेशन के द्वारा स्वयं सीख सकता है। शिक्षण में भी अनुदेशन का प्रयोग किया जाता है, इसीलिए शिक्षण को तो अनुदेशन कहा जा सकता है, किन्तु अनुदेशन को शिक्षण नहीं कहा जा सकता क्योंकि अनुदेशन में शिक्षक और छात्र के बीच अन्तःप्रक्रिया का होना आवश्यक नहीं है।

अनुदेशन तकनीकी मशीन तकनीकी पर आधारित है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दृश्य-श्रव्य सामग्री, जैसे रेडियो, टेलीविजन, रिकॉर्ड प्लेयर, प्रोजेक्टर आदि आते हैं। इनकी सहायता से विद्यार्थियों के बड़े-बड़े समूहों को कम से कम समय तथा कम खर्च में ज्ञान दिया जा सकता है।

अनुदेशन तकनीकी

“अनुदेशन तकनीकी का तात्पर्य प्रविधियों अथवा विधियों के उस समूह से है जो किन्हीं ना सुनिश्चित अधिगम लक्ष्यों को प्राप्त करता है।”

ए. आर. शर्मा अनुसार

“अनुदेशन तकनीकी शिक्षण और सीखने की समस्त प्रक्रिया को विशिष्ट उद्देश्यों के – रूपरेखा तैयार करने, चलने तथा उसका मूल्यांकन करने की एक क्रमबद्ध रीति है। यह शोधकार्य तथा मानवीय सीखने एवं आदान-प्रदान करने पर आधारित है। इसमें शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए मानवीय तथा अमानवीय साधन प्रयुक्त किये जाते हैं।”

एस. एम. मैकमूरिन

इस परिभाषा से स्पष्ट होता है कि अनुदेशन तकनीकी में सीखने की प्रक्रिया सम्बन्धी उद्देश्यों की रूप-रेखा तैयार करने, उसको प्रेरित करने, आगे बढ़ाने एवं पाठ को प्रस्तुत करने हेतु अनेक प्रविधियाँ, विधियाँ, युक्तियों एवं दृश्य-श्रव्य सामग्री प्रयुक्त की जाती है और अंत में उद्देश्यों की प्राप्ति का मूल्यांकन करके आवश्यकता के अनुरूप परिवर्तन किया जा सकता है ताकि उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। इसके अतिरिक्त यह तकनीकी मानवीय सीखने के आदान-प्रदान सम्बन्धी शोध कार्यों पर आधारित है तथा इस तकनीकी में शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए मानवीय एवं अमानवीय दोनों प्रकार के साधन उपयोग में लाये जाते हैं।

अनुदेशन तकनीकी की अवधारणायें

अनुदेशन तकनीकी की अवधारणायें निम्नलिखित हैं

  1. पाठ्यवस्तु का चुनाव उसके उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
  2. इस तकनीकी में पाठ्यवस्तु का प्रस्तुतीकरण स्वतंत्र रूप से तथा पाठ्यवस्तु को छोटे-छोटे तत्वों में विभाजित करके किया जा सकता है।
  3. पाठ्यवस्तु के छोटे-छोटे तत्वों की सहायता से समुचित अधिगम की परिस्थितियाँ उत्पन्न की जा सकती हैं।
  4. पाठ्यवस्तु के प्रस्तुतीकरण में अनेक विधियों, प्रविधियों तथा दृश्य-श्रव्य सामग्री की सहायता से अधिगम के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
  5. इस तकनीकी की मदद से विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत विभिन्नताओं के अनुसार सीखने का अवसर दिया जाता है।
  6. अनुदेशन सामग्री की सहायता से विद्यार्थियों को सीखने की दिशा तथा उनको समुचित पुनर्बलन प्रदान किया जा सकता है।
  7. अध्यापक की अनुपस्थिति में भी विद्यार्थी स्वयं अध्ययन द्वारा सीख सकता है।
  8. यह तकनीकी विद्यार्थियों में अपेक्षित व्यवहार परिवर्तन लाने में सहायता करती है।
  9. इस तकनीकी के द्वारा शिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायतार्थ मिलती है।

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